तुम, तुम नही तुम, हाँ हाँ तुम
आख़िर क्यों मज़ाक उड़ा रहे हो मेरा?
क्या तुमने कभी झपकी नही ली?
क्या तुम कभी इतनी गहरी नींद मे नही गये,
इतनी गहरी की देश का सुनहरा भविष्य देख सको?
क्या कभी तुमने सपने देखे हैं?
क्या तुम कभी सपने देख सकते हो?
हाँ, जानता हूँ कॉंग्रेस ने सपने देखने लायक नही छोड़ा
फिर भी क्या तुमने कभी कोशिश की है सपने देखने की?
क्या कभी की है कोशिश?
नही ना? मैने की है...
मैने की है कोशिश सपने देखने की...
मैने की है कोशिश RTI लागू करने की
मैने की है कोशिश वुमन एम्पावरमेंट की
मैने की है कोशिश देश को समझदार बनाने की
और मैने कर भी दिया...मैने देश को इतना तो समझदार बना ही दिया की वो कॉंग्रेस को अब कभी दोबारा इस देश की सरकार नही बनाएँगे..
तो क्यों, आख़िर क्यों करते हो मेरी इज़्ज़त से खिलवाड़,
क्यो उड़ाते हो मेरा मज़ाक, क्यों? क्यों? क्यों? मम्मी...
आख़िर क्या बात है वो जो तुम्हे खाए जा रही है जो तुम मेरा दिमाग़ खाए जा रहे हो जो की है ही नही?
आख़िर क्या बात है की तुम्हे मेरी उड़ती हुई इज़्ज़त उस गैस के गुब्बारे जैसी लगती है जिसको देख तुम तालियाँ बजाते हो? आख़िर क्यों?
क्या कभी तुमने सोचा है की मैं क्या हूँ?
मेरा मतलब मैं कौन हूँ?
मैं हूँ एक ऐसा नेता जो लोगों के घरो मे खाना ख़ाता है इस बात का भरोसा दिलाने के लिए की उनके घर मे अनाज की कमी नही है ताकि वो हमसे माँग ना सकें... मैने लोगों को सिखाया है आत्मनिर्भर होना...और तुम मेरा मज़ाक उड़ाते हो? आख़िर क्यों?
आख़िर ऐसी क्या ग़लती कर दी मैने?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो इतना हंगामा खड़ा कर दिया तुमने...आख़िर क्या?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो तुम इतना बिगड़ गये?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो मेरे देखे गये सपनों पर तुम्हे यकीन नही?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की तुम मुझे आउल बाबा कहते हो?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो तुम मुझे चूतिया कहते हो?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की मुझे दुतकारा जाता है?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की तुम मुझे दिमाग़ से पैदल कहते हो?
उस दिन मैने संसद मे सोकर ये दिखाया की मैं सपने देख सकता हूँ और दिखा भी सकता हूँ तो आख़िर क्या हुआ जो मैं सो गया?
बताओ, बोलो बोलो? क्या हुआ जो मैं सो गया?
- राहुल गाँधी (संसद भवन AC रूम से)
आख़िर क्यों मज़ाक उड़ा रहे हो मेरा?
क्या तुमने कभी झपकी नही ली?
क्या तुम कभी इतनी गहरी नींद मे नही गये,
इतनी गहरी की देश का सुनहरा भविष्य देख सको?
क्या कभी तुमने सपने देखे हैं?
क्या तुम कभी सपने देख सकते हो?
हाँ, जानता हूँ कॉंग्रेस ने सपने देखने लायक नही छोड़ा
फिर भी क्या तुमने कभी कोशिश की है सपने देखने की?
क्या कभी की है कोशिश?
नही ना? मैने की है...
मैने की है कोशिश सपने देखने की...
मैने की है कोशिश RTI लागू करने की
मैने की है कोशिश वुमन एम्पावरमेंट की
मैने की है कोशिश देश को समझदार बनाने की
और मैने कर भी दिया...मैने देश को इतना तो समझदार बना ही दिया की वो कॉंग्रेस को अब कभी दोबारा इस देश की सरकार नही बनाएँगे..
तो क्यों, आख़िर क्यों करते हो मेरी इज़्ज़त से खिलवाड़,
क्यो उड़ाते हो मेरा मज़ाक, क्यों? क्यों? क्यों? मम्मी...
आख़िर क्या बात है वो जो तुम्हे खाए जा रही है जो तुम मेरा दिमाग़ खाए जा रहे हो जो की है ही नही?
आख़िर क्या बात है की तुम्हे मेरी उड़ती हुई इज़्ज़त उस गैस के गुब्बारे जैसी लगती है जिसको देख तुम तालियाँ बजाते हो? आख़िर क्यों?
क्या कभी तुमने सोचा है की मैं क्या हूँ?
मेरा मतलब मैं कौन हूँ?
मैं हूँ एक ऐसा नेता जो लोगों के घरो मे खाना ख़ाता है इस बात का भरोसा दिलाने के लिए की उनके घर मे अनाज की कमी नही है ताकि वो हमसे माँग ना सकें... मैने लोगों को सिखाया है आत्मनिर्भर होना...और तुम मेरा मज़ाक उड़ाते हो? आख़िर क्यों?
आख़िर ऐसी क्या ग़लती कर दी मैने?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो इतना हंगामा खड़ा कर दिया तुमने...आख़िर क्या?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो तुम इतना बिगड़ गये?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो मेरे देखे गये सपनों पर तुम्हे यकीन नही?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की तुम मुझे आउल बाबा कहते हो?
आख़िर ऐसा क्या हुआ जो तुम मुझे चूतिया कहते हो?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की मुझे दुतकारा जाता है?
आख़िर ऐसा क्या हुआ की तुम मुझे दिमाग़ से पैदल कहते हो?
उस दिन मैने संसद मे सोकर ये दिखाया की मैं सपने देख सकता हूँ और दिखा भी सकता हूँ तो आख़िर क्या हुआ जो मैं सो गया?
बताओ, बोलो बोलो? क्या हुआ जो मैं सो गया?
- राहुल गाँधी (संसद भवन AC रूम से)
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