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Saturday, 22 February 2014

राइज़ ऑफ द छह छह गोलीवाले बाबा।

       सभी निकम्मे नाकारे और वेल्ले भक्तगनों (या यूँ कहो की लतमारों) को सादर आशीर्वाद...बूढ़े बुजुर्गों को प्रणाम, महिलाओं को "दूधो नहाओ पूतों फलो" और युवतियों को ढेर सारा प्यार, कई वर्षों तक चंबल की घाटियों मे गोली बारूद, गांजा और खैनी की बारीशों और तूफ़ानो के बीच बड़ी ही अटलता से तपस्या करने के पश्चात (या यूँ कह लो बहुते वक्त बर्बाद करने के बाद समझ आया की ज़िंदगी वहाँ चंबल में नही यहाँ मानवी जंगल मे है रे पुष्पा!) और हमने बहुत से वरदान भी पाएँ हैं जानी. पश्चात, कई वर्षों तक इस विचार मे मग्न रहे की इस  वरदान का क्या किया जाए, आचार तो हमे डालना आता नही था तो हमने सोचा क्यों ना इन वरदानो को मानवता के कामों मे लाएँ और फिर हम निकल पड़े बेवड़ा फ्री राज्य गुजरात की ओर....

आप सोच रहे होंगे की एक बाबा का ब्लॉग कैसे हो सकता है और कोई सन्यासी कैसे इतनी असीम शक्तियों का मालिक हो सकता है? आज हम आपको आपके दोनो सवालों के जवाब दे देंगे. तो यह किस्सा शुरू हुआ था ईस्वी सन 201 मे जब हमने अपनी तपस्या की शुरुआत की थी... उसके कई सदियों पश्चात हमारे मठ मे एक व्यक्ति ने हमे टुइटर से अवगत कराया और बताया की वहाँ पर लेन देन का बिजनेस चलता है, जहाँ मशहूर लोग देते हैं और सामान्य लोग कह के लेते हैं, हमारी लेने की तो किसी के हिम्मत हुई नही, तो फिर हमने ही सबकी लेने की ठान ली और अपने दोनो अंगूठे टुइटर को दान कर दिए और इसी तरह हम एक्लव्य से भी महान हो गये, अब दिनभर टूई टूई करते रहते हैं, खैर...

हमारी शक्तियों में निन्मलिखित खास बातें हैं, कृपया नोट कर लें और हमारे प्रकोप से बच जाएँ :

१. हम सबकी समान रूप से लेते हैं ताकि किसी को भी ऐसा न लगे की हमारा ध्यान उनपर नहीं है।

२. लेनदेन के इस व्यवसाय में भी हम किसी की लेने के लिए कोई शुल्क नही लेते।

3. हमारे पास एक खास यंत्र है जिससे हम लड़कियों को आकर्षित करते हैं और ठर्कियोन, उस यंत्र को इन्स्टाग्राम कहते हैं।

और अब जब टुइटर पर टूई टूई करनेवाला हर कोई ब्लॉग लिखता है तो हम सोचे की हम भी थोड़ा हिलाय लें, आपना उंगली को...ताकि हम भी ब्लॉग लिखें... साला हमेशा, हमेशा ग़लत ही सोचो, गंदी सोच वाले मनुष्य और सबसे मुख्य बात यह है हरामखोरों, कि हमारे लिए गोलियों का मतलब सिर्फ़ अंडकोष ही नही होता।

तो ये है किस्सा हमारे ब्लॉग का, आप आते रहें, मज़े लेते रहें... हमारे तुच्छ तुच्छ जोक पर हसते रहें, तो कुल मिलाकर बात ये है की पढ़ते रहें और बढ़ते रहें क्यों की पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया।